- शहर के 16 मलिन बस्तियों में पीएसआई-टीसीआईएचसी के सहयोग से हो चुके हैं आयोजन
- 250 महिलाओं के साथ 35 पुरुष भी कर चुके हैं प्रतिभाग
- त्योहार के समय अपनाए जाने वाले कोविड व्यवहार के बारे में दी जा रही है जानकारी
गोरखपुर, 31 अक्टूबर 2020। महानगर के मलिन बस्तियों में इन दिनों परिवार नियोजन के बारे में जागरूकता अभियान के साथ कोविड समुचित व्यवहार जागरूकता कार्यक्रम पर फोकस बढ़ गया है। इस बारे में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वयंसेवी संस्था पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल (पीएसआई)-द चैलेंज इनीशिएटिव फॉर हेल्दी सिटीज (टीसीआईएचसी) के सहयोग से शहर की 16 मलिन बस्तियों में गतिविधियां आयोजित की जा चुकी हैं, जिनका थीम है "दूरी....जो रखे जिन्दगी के करीब "मिशन की मंडलीय कंसल्टेंट डॉ. प्रीति सिंह ने बताया कि इन गतिविधियों में 250 महिलाओं के साथ 35 पुरुष भी प्रतिभाग कर चुके हैं। परिवार नियोजन के स्थायी और अस्थायी साधनों पर जानकारी देने के साथ-साथ कोविड-19 व्यवहार के बारे में जानकारी देने पर जोर है। खासतौर से दीपावली और छठ आदि त्योहारों के समय अपनाए जाने वाले कोविड व्यवहार के बारे में जानकारी दी जा रही है। यह गतिविधियां आगे भी जारी रहेंगी।
मंडलीय कंसल्टेंट ने बताया कि इन गतिविधियों में 15 से 49 उम्र वर्ग की महिलाओं को शामिल किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि त्योहार में किसी का भी स्वागत दो गज दूरी बनाए रखते हुए करना है। घर के परिसर में कोई बाहरी आगंतुक आता है तो बेहिचक मॉस्क लगा कर स्वागत करना है। घर से बाहर कम से कम निकलना है और जब भी निकलें मॉस्क का इस्तेमाल अवश्य करें। महिलाओं के साथ पुरूषों को विशेष तौर पर संवेदीकृत किया जा रहा है कि वह पान-मसाला और गुटखा खाकर या वैसे भी खुले में न थूकें क्योंकि इससे कोरोना के प्रसार का खतरा है। नांक, मुंह और आंखों को हाथ नहीं लगाएं और समय-समय पर साबुन-पानी या फिर सेनेटाइजर से हाथों की सफाई करते रहें। उन्होंने बताया कि दम्पत्तियों को यह भी समझाया जा रहा है कि कोरोना काल में भी सुरक्षित परिवार नियोजन सेवाएं सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध हैं और बिना किसी संकोच के उनका लाभ लिया जाना चाहिए।
आशा बुलाती हैं प्रतिभागी
जाफरा बाजार क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता ज्योति शर्मा ने बताया कि पीएसआई-टीसीआईएचसी संस्था के प्रोग्राम मैनेजर केवल सिंह सिसौदिया और उनकी टीम के पवन, तूलिका और प्रियंका इन गतिविधियों के लिए महिलाओं को जुटाने के लिए प्रेरित करते हैं। मलिन बस्ती में दो गज दूरी बना कर प्रतिभागियों को बैठाया जाता है। सबसे पहले उन्हें 60 सैकेंड तक हाथ धोने का तरीका सिखाया जाता है और इसके बाद पहले परिवार नियोजन के बारे में बात होती है और फिर कोरोना के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है। हुमायूंपुर क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता संध्या यादव का कहना है कि इन आयोजनों में महिलाओं को कोरोना के बारे में जानकारी देने पर विशेष जोर है क्योंकि अगर उनका व्यवहार बदला तो पूरे परिवार में व्यवहार परिवर्तन आसान हो जाता है। गतिविधियों के दौरान भी कोरोना से बचाव के सभी उपाय होते हैं।
त्योहारों में विशेष सतर्कता आवश्यक
छठ और दीपावली पर्व को देखते हुए लोगों को अपने व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा। त्रिस्तरीय मॉस्क का इस्तेमाल करना होगा, दो गज दूरी बना कर रखनी होगी और हाथों की साफ-सफाई पर विशेष जोर देना होगा। समुदाय के विशेष सहयोग से ही कोरोना महामारी का सामना किया जा सकता है। लोगों को संवेदीकृत करने के लिए जो स्वास्थ्यकर्मी और संस्थाएं प्रयासरत हैं, लोगों को उनका सहयोग करना चाहिए।
डॉ. श्रीकांत तिवारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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