सीएम योगी की बैठक के बाद बदले सुर, रविकिशन ने की एकजुटता की बात, डा.राधा मोहन ने बोले-' यह विवाद नहीं संवाद था'
गोरखपुर। सीएम योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर पहुंचते ही पिछले कई दिनों से गोरखपुर में भाजपा के जनप्रतिनिधियों के बीच चल रहा घमासान खत्म होता नज़र आ रहा है। सीएम योगी ने बैठक में सांसदों और विधायकों को एकजुट रहने और विवादों को खत्म करने का साफ संदेश दिया।
बैठक से बाहर निकले डा.राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि उनका किसी से कोई विवाद नहीं था। यह संवाद था। मीडिया को गलतफहमी हुई है। बकौल डा.राधा मोहन, बैठक में मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से कोविड-19 के संक्रमण के खिलाफ चल रही लड़ाई में सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि सीएम ने एक-एक जनप्रतिनिधि को ध्यान से सुना। उन्होंने गोरखपुर की जलनिकासी की समस्या के समधान का भरोसा दिलाया। एक प्रश्न के उत्तर में डा.राधा मोहन ने कहा कि यह लोकतंत्र है। सभी की अपनी-अपनी सोच होती है। हम अपनी बात सरकार को बताते हैं और मीडिया उसे विवाद का नाम दे देता है। वास्तव में इसके लिए उपयुक्त शब्द विवाद नहीं, संवाद होना चाहिए।
सांसद रविकिशन ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कोविड-19, इंसेफेलाइटिस और बाढ़ को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को जन-जन तक पहुंचाने और लोगों को सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताने का आह्रवान किया।पिछले एक पखवारे से चल रहे विवाद के बारे में पूछे जाने पर रविकिशन ने कहा कि सीएम ने सबसे कहा कि एकजुट रहें। पिछले दस दिनों गोरखपुर को लेकर जो बातें हुई हैं, उन्हें ठीक करें। सांसद ने कहा कि बैठक में विभिन्न विषयों पर बात हुई। इस प्रकरण को लेकर डिटेल में बात नहीं हुई।
बैठक में शामिल रहे अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी कोविड-19, इंसेफेलाइटिस और बाढ़ में सरकार के प्रयासों को जन-जन तक पहुंचाने की बात कही।
ये था विवाद-
गौरतलब है कि डा.राधा मोहन द्वारा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मिलकर पीडब्लूडी के एक इंजीनियर की शिकायत करने के बाद पिछले एक पखवारे से भाजपा के जनप्रतिनिधियों में घमासान मचा हुआ था। सांसद रविकिशन, गोरखपुर ग्रामीण से विधायक विपिन सिंह, कैम्पियरगंज से विधायक फतेहबहादुर, सहजनवां से विधायक शीतल पांडेय ने इंजीनियर को मेहनती, ईमानदार और काबिल बताते हुए उन्हें न हटाने के लिए पत्र लिखे थे जबकि बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान और विधायक विमलेश पासवान ने डा.राधा मोहन का समर्थन किया। हालांकि बाद में पीडब्लूडी इंजीनियर को मुख्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया। इसी दौरान एक दिन डा.राधा मोहन ने अपने एक ट्वीट में-'अपने विधायक होने पर गुस्सा आता है...' लिखकर अपने गुस्से का इजहार किया था।
तल्खी बढ़ी तो सांसद रविकिशन ने डा.राधा मोहन से इस्तीफा मांग लिया। कैम्पियरगंज के विधायक फतेहबहादुर और डा.राधा मोहन के बीच तो फेसबुक पर जमकर वार-पलटवार भी हुआ। इस बीच पार्टी हाईकमान ने डा.राधा मोहन को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया लेकिन विवादों का सिलसिला थमा नहीं। पिछले दो दिन से जनप्रतिनिधियों का रुख थोड़ा नरम दिखाई दे रहा था। कल डा.राधा मोहन अपने फेसबुक पर पीडब्लूडी इंजीनियर को सम्बद्ध किए जाने का आदेश लागू हो जाने की सूचना पोस्ट की।
इसके बाद मीडियाकर्मियों को वाट्सएप पर भेजे एक बयान में कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी की जनसंवेदनशील राजनीति और पार्टी के लोकतंत्र पर पूरा भरोसा है। आज मुख्यमंत्री की बैठक से निकलने के बाद उन्होंने यह कहकर कलह पर पानी डालने की कोशिश की कि यह कोई विवाद नहीं संवाद था। मीडिया को गलतफहमी हुई है।
बैठक से पहले जनप्रतिनिधियों की हुई कोरोना जांच
बैठक से पहले सभी जनप्रतिनिधियों की कोरोना जांच की गई। मुख्यमंत्री आज गोरखनाथ मंदिर में रात्रि विश्राम करेंगे। सोमवार की सुबह मुख्यमंत्री दोनों ब्रह्मलीन महंतों के सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह में ऑनलाइन शामिल होंगे। इसी दिन मुख्यमंत्री बीआरडी मेडिकल कालेज स्थित बाल संस्थान में निर्मित 300 बेड के कोविड अस्पताल का उदघाटन करेंगे। उसके बाद लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे।
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