जनकपुरी से 14 किलोमीटर दूर उत्तर धनुषा नाम स्थान में हुआ था राम-जानकी विवाह


विवाह पंचमी के दिन विधि-विधान के साथ जनकपुरी से 14 किलोमीटर दूर उत्तर धनुषा नाम स्थान है। जनकपुर वर्तमान में नेपाल में स्थित है। यहां कुछ दूर उत्तर धनुषा में बताया जाता है रामचंद्रजी ने इसी जगह पर धनुष तोड़ा था। पत्थर के टुकड़े को इस प्रसंग का अवशेष बताया जाता है। पूरे वर्षभर और खासकर विवाह-पंचमी पर यहां दर्शनार्थियों की भीड़ रहती है।



  • धनुष नहीं अहंकार तोड़ा


विवाह ऐसा संस्कार है जिसे प्रभु श्रीराम और कृष्ण ने भी अपनाया। भगवान राम ने अहंकार के प्रतीक धनुष को तोड़ा। यह इस बात का प्रतीक है कि जब दो लोग एक बंधन में बंधते हैं तो सबसे पहले उन्हें अहंकार को तोड़ना चाहिए और फिर प्रेम रूपी बंधन में बंधना चाहिए। यह प्रसंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों परिवारों और पति-पत्नी के बीच कभी अहंकार नहीं टकराना चाहिए क्योंकि अहंकार ही आपसी मनमुटाव का कारण बनता है।



  • जब सीता ने उठाया धनुष


त्रेता युग में मिथिला नरेश जनक के राज्य में जब अकाल पड़ा तो उसके निवारण के लिए जनक ऋषि-मुनियों के पास गए। उनके सुझाव पर जनक ने भूमि को जोतना शुरू किया। हल जोतते हुए हल का अग्र भाग किसी वस्तु से टकराया और वहीं रुक गया। जब जनक ने मिट्टी हटाकर देखा तो उन्हें एक कन्या मिली। राजा ने उसे अपनी पुत्री स्वीकार किया। नाम रखा सीता, जिन्हें वैदेही और जानकी भी कहा गया। राजा जनक शिवधनुष की पूजा करते थे। एक दिन उन्होंने देखा कि जानकी ने शिव के धनुष को हाथ में उठा लिया है। राजा जनक ने प्रतिज्ञा की कि जो शिवधनुष तोड़ेगा जानकी का विवाह उसी के साथ होगा। सीता के स्वयंवर में जब कोई धनुष को उठा भी नहीं पाया तब श्रीराम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया और वह टूट गया। इस तरह राम और सीता का विवाह हुआ।


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